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Asmita prashant Pushpanjali

Others

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Asmita prashant Pushpanjali

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बाकी है।

बाकी है।

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आने दो बहार को

गुल खिलने बाकी है

रूत बदले, मौसम बदले

वक्त बदलना बाकी है


कलियाँ खिली, गुलशन में

पतझड़ आनी बाकी है

कब बरसे बूँदें बारीश की,

घटा घिर आनी बाकी है


उजड़े हुये चमन में

शोख कलियाँ खिली है अभी अभी

मनचले चंचल भंवरों की,

अभी नियत डोलनी बाकी है



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