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Pradeepti Sharma

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Pradeepti Sharma

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ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

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तुम, 

अनंत हो, 

स्वतंत्र हो, 

जीवन मृत्यु के पर्यंत हो।


महाकाल हो, 

विकराल हो, 

अनूठा सा एक सवाल हो।


शांत रूप, 

एकांत में, 

एकाग्र हो, निशांत में।


रूद्र हो, 

प्रचंड हो, 

भैरव हो, अखंड हो।


खुद ही, 

राग हो,  

ताल हो, 

भैरवी नटराज हो।


महादेव हो, 

सदैव हो, 

प्राणियों के बुधेव हो।


प्रत्यक्ष हो, 

निष्पक्ष हो, 

हर कण के समक्ष हो।


निराकार हो, 

ॐ की पुकार हो, 

ब्रह्माण्ड का आधार हो।

 

आज शिवरात्रि पर, 

मेरा शत शत नमन स्वीकार हो।


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