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Om Prakash Gupta

Others

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Om Prakash Gupta

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अरे, खोजो तो सही

अरे, खोजो तो सही

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कोलाहल में, खो गये आदमी में,

अब शांत का इंसान, खो गया है।

लाभ -लोभ से, खाने के चीज़ों में,

मिलौने में कहीं मानक खो गया है।

अटके है नस्ति औ लटके बस्ती में,

सूने में भटका, अरे खोजो तो सही ।१।


बसी भावना से खेल कर, वारंटी ने,

रैपर साथ शुद्धता निशां खो दिया है।

जंगल में, इंसानियत का चोला ओढ़,

भेड़िया, ताल में जलकुंभी बो रहा है।

पैदावार की आड़ में खूनी पतवार बन,

चूस रहा खून कोई, अरे खोजो तो सही।२।


आसमानी हवा को, नीचे जमीं नहीं दिखे,

धरा से जाने कहीं, रुहानी चांद खो गया है।

रिश्तों में निभती, रिवाज के पाक आड़ में,

छिप सांप कहीं विष तो नहीं उगल रहा है।

श्वासों को छोड़ने और लेने के बीच बैठकर,

हैवान शोषण करता हो, अरे खोजो तो सही।३।



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