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Vandana Srivastava

Children Stories Drama Tragedy

4  

Vandana Srivastava

Children Stories Drama Tragedy

अंतःभय

अंतःभय

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देख आईने में अपने गर्भ को

मां प्यार से उसे सहला रही,

अपने शिशु से जल्दी मिलने की,

बेचैनी उसको साल रही,


नयनों में भरी हुई अधीरता,

मुझको उसकी तोड़ रही,

कैसे मिला पाऊंगा नज़रें,

जो तू बाट मेरी जोह रही,


देख रहा हूं भीतर से मैं मां

हर पल तुमको हर्षित होते हुये,

क्या बाहर भी मुझको, प्यार करोगी,

कभी भी बिना आक्रोशित हुये,


हर पल तुम उत्साहित हो,

गर्भ को अपने निहारती हो,

बातों ही बातों में प्यार अपना जताती हो,

दिनचर्या तुम अपनी मुझको सारी बताती हो ,


मां मुझको बाहर मत आने दो,

ये प्यार यूं ही कायम रहने दो,

मुझको डर बहुत सताता है,

क्या अपना पाओगी जताता है,


अक्षम शरीर नयनों में नीर,

सही ना जाये मां मुझसे ये पीर,

बातों के तीर ,देंगे हृदय को चीर,

कोसोगी तुम भी अपनी तकदीर,


अभिमन्यु सरीखा मैं भी भीतर,

सुनता हूं तेरी बातें अश्रु भर कर,

कितनी संवेदनायें जुड़ी मुझसे,

कितनी अपेक्षायें करती हो मुझसे,


सहानुभूति में दया का मिश्रण,

पल पल खत्म होगा आकर्षण,

ना जाने किसका श्राप है,

पर मेरा ना कोई अपराध है,


वास्तविकता से तू अंजान है,

पर क्या इतनी तू महान है ,

परित्याग तो ना कर दोगी मेरा,

ममत्व खत्म ना हो जाये तेरा,


अंतःभय की सकल वेदना,

स्पंदित हृदय की विह्वल भावना,

असहनीय क्षुब्ध होती संवेदना,

सृष्टि की यह रचित कल्पना,


वाह्य जगत का दिखे अंधियारा,

शब्द गूंजते हैं बेचारा बेचारा,

हृदय बेधित वाणी की पीड़ा,

शून्य में विलीन होता जाये उजियारा,


बचा कुछ ही समय अब शेष है,

मेरा जन्म तेरे लिये विशेष है,

हो रही है प्रसव पीड़ा ,

देख रहा हूं समय की क्रीड़ा,


मैं तेरी आगोश में हूं,

रिश्तों के परिवेश में हूं,

देख रहे हैं सब हिकारत से मुझे,

ताने दे रहे हैं सब तुझे,


तू भी चण्डी बन गरज रही है,

मेरा अंश है कह मुझे चूम रही है,

जैसा भी है ईश्वर की देन है,

मुझे मां की पदवी देने वाला दूजा कौन है,


देख रही हो मुझे नयन प्रीत भर,

अंतःभय मेरा हो गया निष्फल,

तू जो साथ है तो मैं दुनिया जीतूंगा ,

तेरा माथा कभी ना झुकने दूंगा,


यूं ही नहीं मां है ईश्वर का अवतार,

अपने शिशु का मजबूत आधार,

उसका दृढ़ निश्चय करता है दृढ़,

मैं कभी नहीं चुका सकता तेरा ऋण,


मां अब मेरा यह प्रण है,

संकल्प अब ये बड़ा सकल है,

अक्षमता मेरी ना बनेगी बाधा,

जीतूंगा विश्व कर लिया ये इरादा..!!



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