STORYMIRROR

Meera Parihar

Others

3  

Meera Parihar

Others

शिवशंकर

शिवशंकर

1 min
114


शिव ही सुख का का मूल हैं, शिव ही शक्ति त्रिशूल ।

शिव बाघाम्बर धारते, भुजंग गले यों, हों जैसे वे फूल।।


सृष्टि रचयिता निज कर लिया , जग हित में विषपान।

नीलकंठ तब कहे "मीरा', जिसे तारें बिना जलयान।।


भांग, धतूरा, दूध, से, जिनका करें प्राणी अभिषेक।

नंदी बैठे द्वार पर, पद मिला उन्हें अति परम विशेष।।



Rate this content
Log in