नारी को अधिकार मिले
नारी को अधिकार मिले
आदिकाल से पोषित पूजित , है वसुधा पर नारी।
गार्गी घोषा, लोगामुद्रा, भइ विदुषी अति भारी।
अर्धांगी बन नर की सदा ही, निज दायित्व निभाया।
धन वैभव सम्मान मान यश, अतुलित जग में पाया।
बीता समय नजरिया बदला, सही गुलामी भारत ने।
रही बन्दिनी भोग्या बनकर, नारी अपने ही घर में।
शिक्षित होकर स्वस्थ कुशल, परिवार राष्ट्र की कल्याणी।
लज्जा धार शील कर पालन, बोले सबसे मृदु वाणी।
फिर भी समाज में छिपे हुए है , पर कुछ ऐसे खल भारी।
मार काट वासना पूर्ति हित, अघ उनके रहते जारी।
उत्पत्ति हुई नारी से नर की, नर का है कर्तव्य यही।
सहयोग प्रेम अरु आदर दे, दिखलाये उन्नत मार्ग सही।
नारी को सम्मान और, अधिकार मिले ना काफी हो।
हो पूत दृष्टि मन शुद्ध करो, अपराधी की ना माफी हो।
अवसर मिले समान अगर, हो न्याय न होवे भेदभाव।
हो उन्नति का मार्ग प्रशस्त, सुखमय जीवन की चले नाव।
