Laxmi Dixit

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प्रिय डायरी बार्टर सिस्टम

प्रिय डायरी बार्टर सिस्टम

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 क्या कोरोना काल में जब अर्थव्यवस्था के पहिए रुक चुके हैं, हम सचमुच पुरातन काल में चले गए हैं। जब मुद्रा का सीधा विनिमय ना होकर बारटर सिस्टम का उपयोग होता था।

बारटर सिस्टम का इतिहास 6000 साल पहले मेसोपोटामिया के कबीले में देखने को मिलता है। फिर फोयनशियंस महासागरों की यात्रा के दौरान विभिन्न शहरों में वस्तुओं का विनिमय इसी सिस्टम के द्वारा करते थे। बेबेलोनियन के लोगों ने तो एक बेहतर बारटर सिस्टम विकसित किया। वे सामान, नमक, चाय, मसाला और हथियार का विनिमय करते थे। रोमन लोग नमक के द्वारा अपने सिपाहियों को सैलरी देते थे। मध्य युग में रेशम ,इत्र का विक्रय वस्तु द्वारा होता था। अमेरिकियों ने चमड़े और गेहूं का आदान प्रदान किया।

 मुद्रा के विकास के बाद भी बारटर सिस्टम का चलन खत्म नहीं हुआ, बल्कि 1930 के दशक के दौरान मुद्रा के अभाव में वस्तु विनिमय खूब फला- फूला। 

 आज काेरोना नाम की वैश्विक महामारी ने ने शताब्दियों पुराने इस सिस्टम को पुनः जीवित कर दिया है।

अमेरिका की बारटर एक्सचेंज कंपनी, वैश्विक महामारी के दौर में अपना व्यापार खूब बढ़़ा रही है ।इस कंपनी में वर्तमान में 850 मेंमबर हैैं और कंपनी का दावा है कि निकट भविष्य में उसके मेंमबर और बढ़ेंगे ।

     यदि किसी को कोई वस्तु चाहिए और उस वस्तु के लिए वह कोई और वस्तु दे सकता है तो कंपनी को कॉल ,टेक्स्ट या ईमेल के द्वारा ग्राहक उस वस्तु को कंपनी के लोकल सर्विस प्रोवाइडर द्वारा विनिमय कर सकता है। ईरान अपने पुराने इंटेक्स बारटर सिस्टम को लागू करना चाहता है ताकि वह ब्रिटेन ,फ्रांस और जर्मनी के साथ अपनी स्वास्थ्य सेवाएं बहाल कर सके । अमेरिका में इस समय टॉयलेेट पेपर तक की कमी हो गई है। तो यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है ।

    हमारे देश में जब लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्ट रुका हुआ है और मुद्रा की तरलता खत्म हो रही है, वस्तु विनिमय का पुराना जमाना लौट आया है । मध्य प्रदेश के उज्जैन के रत्नाखेड़ी गांव में लोग गेहूं, सब्जी, शक्कर, चायपत्ती ,दूध आदि का विनिमय करके अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं । हालांकि इन वस्तुओं की कीमतों में भारी अंतर है लेकिन उनका कहना है की हमारे लिए जरूरत अहमियत रखती है।

    फंडा यह है कि आपत्ति के समय कीमत नहीं आवश्यकता महत्वपूर्ण हो जाती है।


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