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मेरी कलम से कुछ लघुकथाऐं.

मेरी कलम से कुछ लघुकथाऐं.

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चिंता का विषय

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बहुत ठंड थी, मैं धूप में बैठा था।यह पता नहीं चल सका, कि धूप मुझे सेंक रही थी! या फिर धूप को मैं सेंक रहा था।

लाइलाज

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वह बहुत बिमार था, डॉ० से सलाह लेने के बजाय बिमारी के संबंध में पड़ोसियों से सलाह मशविरा किया। घर के लोग बहुत परेशान थे, कुछ सूझ नहीं रहा था। अचानक क्या हुआ,कि घर के लोग उसे डॉ० के पास ले गए। डॉ० मरीज़ देखने के बाद बिमारी लाइलाज है। बहुत देर कर दी। वह चल बसे।

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उसके पास तीन रुपए थे। जिसमें से एक रूपया खोटा था। जेबें फटी हुई थी, एक सिक्का गिर गया, उसे ढूंढने के लिए वह जमीन पर झूका और उसके ऊपर के जेब में दो और सिक्के थे वह भी जमीन पर गिर गया। दो रुपए के साथ में एक खोटा सिक्का भी खो गया। वह अब गमगीन है। बेरोजगारी के आलम में अपने ऐसे ही साथ छोड़ देते हैं चंद सिक्कों के मानिंद।

चौकीदार

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गाँव में चोर घुस आया। गाँव के किसी आदमी को भनक लग गई। उसने पड़ोसी से कहा पांच दस लोग इकट्ठे हो गए!"चोर-चोर" वहीं चौकीदार पहरा दे रहा था। पकड़े जाने के डर से बचने के लिए चोर चौकीदार के पास गया,और पूछा इधर से किसी चोर को जाते हुए देखा है।तब तक गाँव के लोग चोर और चौकीदार के पास इकट्ठे हो गए।चोर कहां गया पता नहीं चला।

ख़बर

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किसान ने आत्महत्या की पहली खबर, दूसरी खबर सीमा पर गोलीबारी में तीन जवान शहीद, तीसरी खबर बैंक लूट ली गई, चौथी खबर एक कुत्ता ने आदमी की जान बचाई, पांचवीं खबर पांच साल के बच्चे का यौन शोषण हुआ अपराधी फरार, छठी खबर पुलिस पिछे पड़ी है। उसने अखबार बगल में रख दिया और चश्मा उतारते हुए बोला ये भी कोई खबर है। एक भी खबर किसी काम की नहीं।


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