Mousmi Bishnu

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2.8  

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लॉकडाउन

लॉकडाउन

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शायद अन्य लोगो के लिए ये एक कैद हो, पर मेरे लिए ये लॉकडाउन अनसुलझे रहस्य खोल रहा है।


लॉकडाउन के दौरान घर पर समय बिता कर मैंने जाना कि, घर में मैंने कभी कुछ खास वक़्त नहीं दिया। जब भी मेरी जरूरत पड़ी घर पर, मैं अपने काम में व्यस्त रहा। मुझे हमेशा से लगता था कि मेरा काम मेरी जरूरत है, पर मेरी जरूरत मेरे अपनों को भी उतनी ही थी। मैंने प्यार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी पर वक़्त उतना कभी दे नहीं पाया। प्रत्येक परिवार प्यार, अपनेपन के साथ आपका बेशकीमती वक़्त भी मांगता है।

इस लॉकडाउन ने मुझे समझाया की अकेलेपन में बाहर की दुनिया लुभाती है, पर इन हालातों में जो अपने घर ना जा सके उनसे ज्यादा अकेला कौन है?मैं कितना आदी हो चुका था इस बाहर की दुनिया का कि, अब मुझे मेरा ही घर काटने कों दौड़ रहा है। पहले वक़्त निकाल कर घर को हो आता था और आज बहाने ढूंढ रहा हूं घर से निकलने के ! इस लॉकडाउन में भी मेरे पास घर से काम करने का विकल्प है परन्तु कई लोग ऐसे है जिनके पास ना कोई नियमित काम है और ना स्थायी घर। इस लॉकडाउन ने मुझे समझाया की सब लोग एक साथ घर में एक दूसरे के पास है पर सबके दिलो के बीच अभी भी कितनी दूरी है।इस लॉकडाउन ने मुझे समझाया कि शायद कुछ और भी है जो मुझे पसंद है करना और काम में व्यस्त होने की वज़ह से वो सब मैं नहीं कर पाया। इस लॉकडाउन ने मुझे समझाया की दिलो में अकेलेपन का सन्नाटा, सड़कों के सन्नाटे से कई ज्यादा है। इस लॉकडाउन ने मुझे समझाया की मेरे दोस्त ज़िंदा है, जिनसे मेरी सालों से बात नहीं हुई। मुझे हमेशा से खुले आसमान का आशियाना पसंद था , परन्तु इस लॉकडाउन ने मुझे समझाया की जिनका घरौंदा ही खुला आसमान है, वो खुद एक छत ढूंढ रहे है। इस लॉकडाउन ने मुझे समझाया की पहले से ही देश की सीमा सुरक्षित है परन्तु कोई और भी है जो जान और घर की परवाह किए बिना निरंतर रूप से मानव सेवा में लगा हुआ है।

इस लॉकडाउन ने मुझे समझाया की हम कितनी भी तरक्की कर ले या कितना भी तकनीकी विकास कर ले पर प्रकृति के सामने हम सब बहुत छोटे है।


बहरहाल, आप जहां भी है, जिसके साथ भी है, सुरक्षित रहे!!



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