जंगल वाली बुढ़िया
जंगल वाली बुढ़िया
।।।जंगल वाली बुढ़िया।।।
।।एक रोचक भावनात्मक कहानी।।
वर्षों पहले,
कुरकुरा नामक एक गांव जो एक जंगल के किनारे बसा हुआ था। वहां के शांति से अपना जीवन यापन करते थे। परंतु वे उस घने जंगल से डरते थे। उनका कहना था कि उस जंगल में एक चुड़ैल रहती है "काली बुढ़िया"।।
कभी कभी वो बुढ़िया गांव आती। उसकी रूप रेखा को देख सभी डर जाया करते थे। उसकी त्वचा सूखी खुरदरी, जैसे पुरानी छाल का पेड़। चेहरे पर गहरी लकीरें और आँखें लाल और गड्ढे में धँसी हुईं, बाल सफेद और उलझे हुए, जैसे किसी ने उन्हें कभी नहीं संवारा। वह हमेशा काले फटे कपड़े पहनती, कंधे पर एक पुरानी झोली लटकाए घूमती।।
गांव के लोगों का कहना था, “उसकी एक नज़र जिस पे पड़ जाए उसकी शामत आ जाती।, बच्चे बीमार हो जाते!!
काली बुढ़िया, जंगल के अंदर तालाब किनारे एक पुरानी, टूटी-फूटी झोपड़ी में रहती थी। रात को उसकी झोपड़ी से अजीब-सी रंग बिरंगी रोशनी निकलती, कभी-कभी हवा में कड़वा बदबू वाला धुआँ फैल जाता।
गाँव वाले उसे देखते ही रास्ता बदल लेते। उसे घृणा की नजर से गांव में देखा जाता। बच्चे उसे देखकर “चुड़ैल! चुड़ैल!” चिल्लाते और पत्थर मारते हुए भागते।
पर असलियत कुछ और थी। काली बुढ़िया सच में चुड़ैल थी या नहीं! ये तो किसी को मालूम नहीं था।, मगर वो बुरी नहीं थी आज तक उसने किसी का अहित नहीं किया था।।
तीस वर्ष पहले जब वह जवान थी, और गांव में ही रहा करती थी। तब किसी अनजान बीमारी के कारण उसके पति की अचानक मृत्यु हो गई उसके बाद कुछ गाँव वालों की भी मृत्यु हुई। जिसके कारण उसे अपशकुन और चुड़ैल माना गया। अंधविश्वासी गांव वालों ने उसका सिर मुड़कर उसको गांव से निकाल दिया था।। तब से वो उस जंगल में रहकर जड़ी-बूटियों का ज्ञान सीखी और बीमार जानवरों से लेकर इंसानों को ठीक करती, कभी कभी वह दवा बना, गाँव के गरीबों और बीमारों को चोरी छिपे दे आती।
लेकिन फिर भी लोग उसे चुड़ैल मानते! और देखते ही डर जाते।एक दिन गाँव में बड़ा अफ़रा-तफ़री मच गया। गाँव के सबसे बड़े जमींदार की इकलौती बेटी लालिमा की अचानक तबियत बिगड़ गई। उसकी साँस फूलने लगी, शरीर नीला पड़ने लगा। वैद्य-हकीम सब हार गए। जमींदार ने चिल्ला-चिल्लाकर कहा, “अगर कोई इस बच्ची को बचा ले, तो मैं उसे आधा गाँव दे दूँगा!”कोई आगे नहीं आया।।
रात के अंधेरे में लालिमा की माँ जगरानी चुपके से जंगल में पहुँची। उसने काली बुढ़िया के बारे में सुन रखा था।
जगरानी काली बुढ़िया की झोपड़ी के सामने घुटनों के बल बैठ गई और रोते-रोते बोली, “अम्मा!! मेरी बच्ची मर रही है…मेरी मदद करो! तुम्हें जो करना हो कर लो, लेकिन उसे बचा लो!”
काली बुढ़िया, झोपड़ी से बाहर निकली और लालिमा की माँ जगरानी को घूरने लगी। उसकी खुरदरी हथेली में एक काला पत्थर था उस पत्थर को दिखाते हुए गुस्से से कहने लगी! “तुम सबने मुझे चुड़ैल कहा, पत्थर मारे, गाली दी। अब मदद चाहिए तो याद आ गई?” उसकी आवाज़ काँप रही थी। लालिमा की माँ जगरानी अपना सिर झुकाए रो रही थी।बुढ़िया ने गहरी साँस ली, उसका दिल पसीजा। फिर अपनी झोली से कुछ सूखी जड़ी-बूटियाँ, एक छोटी काँच की शीशी और एक पुरानी हड्डी निकाली। और कहा, “चलो।
दोनों जंगल की पगडंडी राह से गुजरते हुए गाँव पहुंचे।
पूरी रात काली बुढ़िया लालिमा के सिरहाने बैठी रही। उसने हरी रोशनी वाली जड़ी-बूटियों का धुआँ किया, मंत्र पढ़े (जो असल में पुरानी भाषा में प्रार्थना थीं), और लालिमा के माथे पर अपनी खुरदरी हथेली रख दी।सुबह होते-होते लालिमा की साँसें सामान्य हो गईं। उसके गाल फिर से गुलाबी हो गए।गाँव वाले इकट्ठा हो गए। जब उन्होंने देखा कि चुड़ैल ने बच्ची को बचा लिया, तो उनके मुँह खुले के खुले रह गए। वे अपराध बोध से भर गए।।
जमींदार रोता हुआ । दौड़कर आया और बुढ़िया के पैरों में गिर गया। बुढ़िया काली ने पैर पीछे खींच लिया। उसकी आँखों में आँसू थे, पर चेहरा पत्थर जैसा कठोर। कहने लगी “मुझे तुम्हारा गाँव नहीं चाहिए। मुझे तुम्हारी इज़्ज़त चाहिए थी… जो तुमने कभी नहीं दी।”उसने अपनी झोली संभाली और वापस जंगल की ओर जाने लगी। उसके पीछे-पीछे लालिमा भी भागी और उसके माता पिता भी। लालिमा ने अचानक उकसा हाथ थामा और कहने लगी। “बुढ़िया अम्मा! रुक जाओ ना!”बुढ़िया रुकी। और उस बच्ची के माथे पर हाथ फेरने लगी। लालिमा उस से बोली, “तुम मेरी अम्मा बनोगी?” काली बुढ़िया का खुरदरा चेहरा पहली बार मुस्कुराया। उसकी लाल आँखों में नमी आ गई।उस दिन के बाद गाँव वालों ने उसे “बुढ़िया अम्मा” कहना शुरू कर दिया। वह अब जंगल से गाँव आती, बच्चों को कहानियाँ सुनाती, बीमारों को दवा देती। उसके बाल अब भी उलझे रहते, त्वचा अब भी खुरदरी थी, मगर लोग अब उसे डर के बजाय प्यार से देखते।और रात को जब जंगल से हरी रोशनी निकलती, तो बच्चे मुस्कुराते हुए कहते, “देखो, बुढ़िया अम्मा जादू कर रही हैं… अच्छा जादू!”
कहानी खत्म।।
सीख:- कभी-कभी जो बाहर से खुरदरा और डरावना लगता है, उसके अंदर एक बहुत नरम दिल छुपा होता है। बस उसे समझना होगा।।।
