भूतिया खरबूजा
भूतिया खरबूजा
नमस्कार दोस्तों पेश है कॉमेडी और हॉरर का तड़का, एक गुदगुदाती कहानी "भूतिया खरबूजा"
भाग १
एक शहर जालिमपुर। सब्जी मार्केट में आज बहुत भीड़ थी। सब्जियां तो महंगी। पर खरबूजा सस्ता । एक काला रंग का किसान ट्रैक्टर भर खरबूजा लाया था। दस के एक दे रहा था।
जालिमपुर शहर के बगल वाले गांव लंगटा पुर से करम जला चाचा भी पधारे थे। साथ में बाबा प्रेम परिवर्तन भी थे। सस्ते खरबूजे के लालच में दोनों दो दो खरबूजे खरीद बैठे।
शाम हो चला। दोनों सकुशल अपने गांव लौटे।
भाग २
ज़ालिम पुर की एक बस्ती, बनिया टोली। रात्रि का दूसरा पहर। अचानक कुछ गड़बड़ होने लगी। लोग पागलों की तरह इधर उधर भागने लगे। किसी को उल्टी तो किसी को दस्त होने लगी।
मंदिर के पास ही नौलखा भिखारी। वो कुत्ते की तरह भौंकने लगा। और पंडित कर्कश आवाज में भजन गाने लगा।
पप्पू उस बस्ती का होनहार लड़का। वो भागता हुआ खुद को प्रधानमंत्री बताने लगा। मोटी धन्नो चाची की आवाज मर्दाना हो गई। और भी बहुत सी गड़बड़ होने लगी। सुबह होते होते पूरा शहर अंजान बीमारी के चपेट में आ गया।
भाग ३
इधर लंगटा पुर में करम जला चाचा को हर्निया की शिकायत होने लगी उनकी सु सु रुक ही नहीं रही थी। वो दौड़े पास की क्लीनिक डॉक्टर घोरजड़ा के पास पहुंचे। उन्होंने देखा डॉक्टर घोरजड़ा खुद की इंजेक्शन खुद को लगा रहा है। चाचा डरे वापस लौट पड़े। चाचा दिमाग लगाने लगे। सोचने लगे।"ई ससुर जब से हमनी खरबूजा खाइल रहा तब से प्रॉब्लमवा हाऊ रहा।" उन्होंने अपना कीपैड फोनवा निकाला और बाबा प्रेम परिवर्तन को लगाया। बाबा ने बताया ई शैतानी खरबूजा है। हम खाए तो हमको ऋतिक की तरह डांस होने लगा है। स्टेप वाइज स्टेप। और न्यूज में भी आ रहा है शहर में हंगामा मचा हुआ है। चाचा ने पूछा "इस से बचने का कौनो तरकीब बाबाजी। बाबा जी ने चाचा को बताया। "उस काले किसान को पकड़ना होगा।"
भाग ४
शहर में हर जगह अफरा तफरी थी। भारत सरकार ने मेडिकल इमर्जेंसी लगा रखी थी। बड़े बड़े डॉक्टर कैंप लगा। उस अबूझ बीमारी का दवा बनाने में लगे थे। शहर का फेमस शराबी व्हिस्की राजा उस शहर में एकमात्र नॉर्मल इंसान था। जिसने शायद खरबूजा ना खाया होगा। फिर भी डॉक्टरों की टीम उसे पकड़ उसकी जांच करने में जुटी थी।
सारे शहर में अंजान रोग फैला लेकिन इस शराबी को क्यों नहीं हुआ।
रात के समय व्हिस्की राजा भाग निकलता है। दौड़े दौड़े बाबा प्रेम परिवर्तन के घर आ धमकता है। बाबा के साथ चाचा भी खड़े समस्या का समाधान खोजने में लगे थे।
उनके साथ वहां टिल्लू और मंगरू भी थे। व्हिस्की राजा को देख वे सभी चौंक गए।
भाग ५
शहर से थोड़ी दूर। उस काले किसान का घर था। और पास ही में खरबूजे के खेत भी।
दो मोपेड उसके घर के सामने रुकी। एक में बाबा, चाचा और टिल्लू थे। दूसरे में मंगरू और व्हिस्की राजा।
सभी किसान का दरवाजा तोड़ अन्दर घुस किसान का गर्दन दबोचते हैं। व्हिस्की राजा दो चार थप्पड़ भी लगा देता है। डरते डरते किसान बताने लगा "सुरैया चुड़ैल ने उसे खरबूजों का बीज दिया था। उसने बताया था पैदावार हजार गुना बढ़ेगी।"
करम जला चाचा उसे हड़का कर उस चुड़ैल का पता पूछते हैं। और उस काले किसान को साथ लेकर उसकी तलाश में निकलते हैं।
भाग ६
कुछ कोश दूर एक छोटा सा जंगल, और एक कच्चा, ऊबड़ खाबड़ रास्ता। उस रास्ते पर किसी तरह हिलते डुलते चलते हुए। एक खपरैल घर के पास पहुंचते हैं। काला किसान उन्हें इशारा करता है। वे समझ जाते हैं। क्योंकि वहां एक अकेला घर वही था।
करम जला चाचा मोपेड से उतर आवाज देते हैं "अरी ओ सुरैया, निकल बाहर।"
चाचा को पुकारते सुन टिल्लू कहता है। "चाचा आप तो ऐसे पुकार रहें हैं जैसे चाची को बुला रहे हैं।"
"ओए लौंडे चुप बिल्कुल चुप" बाबा प्रेम परिवर्तन टिल्लू को डांटते हैं।
तभी अचानक व्हिस्की राजा को क्या सुझा। टिल्लू और मंगरू को साथ लेकर घर के पीछे चला गया।
भाग ७
उस खपरैल घर के बाहर बाबा समाधि लगा बैठे कुछ मंत्रोच्चार करने लगे। चाचा को कुछ काम ना सूझा, उन्होंने बीड़ी सुलगा ली। और वो काला किसान वहां अहसाय सा खड़ा दुनो को देखने लगा।
इधर व्हिस्की राजा, टिल्लू और मंगरू घर के पीछे खिड़की से अंदर झांक रहे थे। अंदर का नजारा देख तीनों चौंक पड़े।
अंदर सुरैया चुड़ैल स्त्री २ का तमन्ना भाटिया वाला ड्रेस पहन उसी गाने में थिरक रही थी। "आज की रात मजा हुस्न का आंखों से लीजिए।" नाचते नाचते अचानक चुड़ैल को कुछ होने लगा शायद बाबा प्रेम परिवर्तन के मंत्रों का कमाल होगा। चुड़ैल लड़खड़ा कर गिरी। पर गिरते गिरते इन तीनों की झांकती शक्लें भी दिख गईं। वो उठी और दहाड़ती तीनों की ओर झपटीं। चुड़ैल को आता देख तीनों डरे भाग पड़े।
इतनी तेजी से दौड़े कि सामने की नाली में गिर पड़े।
भाग ८
सुरैया चुड़ैल अपने खपरैल मकान से दहाड़ती बाहर आई। सामने बाबा बैठे दिखे। बाबा को देख गुस्से से भड़क गई।
बाबा की लंगोटी खींच डाली। बाबा जॉकी की चड्डी पहने थे। वे शर्म से झाड़ियों में जा घूंसे। फिर वो बीड़ी पीते चाचा पर झपटी। चाचा की कान पकड़ उन्हें दूर उछाल फेंकी।
उसके बाद बचा,काला किसान, जो अपने असली रूप में आ गया था। वो कोई किसान नहीं। बल्कि प्राचीन काल का राक्षस कल्लू सुर था। जिसके पास रूप बदलने की शक्ति थी पर रंग नहीं बदल पाता, रहता काला ही।
भाग ८
सुबह हो रही है। शहर में अब भी कयामत छाई है। पागलों वाली बीमारी चारों ओर फैली है।
इधर जंगल में उस सुरैया चुड़ैल के घर के बाहर पेड़ से बाबा और चाचा दोनों बंधे पड़े हैं। वहीं पास सुवर के बाड़े में व्हिस्की राजा, टिल्लू और मंगरू जैसे दिखते तीन सुवर घूम रहे हैं।
चाचा और बाबा को धीरे धीरे होश आने लगा। पास के बाड़े में कैद सुवरों देख वे समझ गए। वे कौन हैं।
उनके पास ही विल स्मिथ जैसा दिखता शख्स खड़ा था।
हाथों में कुल्हाड़ी लिए। वो और कोई नहीं कल्लू राक्षस था, वेश बदले। तभी उस खपरैल घर से करीना कपूर जैसी दिखती सुंदरी निकल आई। अपने हाथों में कुछ शीशियां पकड़े।
भाग ९
एक रात पहले, इधर लंगटा पुर गांव में टिल्लू और मंगरू को ना पाकर ललुआ बहुत दुखी था। वो रात से उन्हें ढूंढने निकला था। सुबह वो भी सुरैया चुड़ैल के घर पास जिसमें चाचा और बाबा बंधे थे उस पेड़ पर चढ़ा उन्हें देख रहा था।
सुरैया चुड़ैल उन्हें बता रही है। वो बाबा प्रेम परिवर्तन को फांसने के लिए ये जाल बुनी थी। क्योंकि भगंदर शैतान उसका बॉयफ्रेंड था। जिसे बाबा ने कैद कर कहीं छुपा दिया है। चाचा और बाकी तीनों बाबा के चक्कर में फंस गए हैं।
बाबा और चाचा खामोशी से उसकी बात सुन रहे थे।
अपनी बात खत्म कर सुरैया चुड़ैल एक शीशी खोल बाबा के मुंह में उड़ेल दी। बाबा तुरंत बकरे में बदल मिमियाने लगे। बाबा की हालत देख चाचा की हालत बिगड़ने लगी।
चुड़ैल ने तुरंत दूसरी शीशी खोल चाचा के मुंह में उड़ेली।
चाचा गटके। और कड़वे स्वाद के कारण उन्हें उल्टी हो गई। जो सुरैया के बदन पर गिरी। उसका रूप अचानक बदला। सुंदर करीना से बदसूरत भयानक चुड़ैल में बदली।
भाग १०
पेड़ के ऊपर चढ़ा ललुआ उस चुड़ैल को देख डरा। और नीचे खड़ा कल्लू राक्षस के ऊपर धड़ाम से जा गिरा।
सुरैया चुड़ैल कुछ समझ पाती, बकरा बने बाबा ने जोर लगाकर सींग मारा। वो उछली। सुअरों के बाड़े में जा गिरी।
जहां तीनों भूखे सुवर उस पर टूट पड़े। नोच नोच कर उसे खा गए। चुड़ैल के मरते ही। उसका काला जादू खत्म होने लगा। व्हिस्की राजा , टिल्लू और मंगरू असली रूप में आए। सुवर से इंसान बने। बकरा भी बाबा बना। कल्लू राक्षस जो ललुआ को पीट रहा था। उन्हें देख भाग खड़ा हुआ।
इंसान बनते ही बाबा ने चाचा को बंधन मुक्त किया। और ललुआ, टिल्लू, मंगरू और व्हिस्की को उस घर को जलाने का आदेश दिया। घर में आग लगा वे अपने अपने घर को लौटे। शहर में अब शांति बहाल हो गई थी। रास्ते में व्हिस्की राजा टिल्लू और मंगरू ने हाजमोला खरीद खाया। कच्चा मांस जो उनलोगों ने खाया था।
इसी के साथ कॉमेडी और हॉरर की मसाले दार कहानी यहीं समाप्त होती है धन्यवाद।
