Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

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Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

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चिंटू की चाची

चिंटू की चाची

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मैं मुम्बई के उपनगरीय इलाके में रहता हूँ ।वैसे तो अब यहाँ की हर चीज - अच्छी भी बुरी भी - मेरे स्वभाव और व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई है ।जब नया नया इस शहर से सामना हुआ था तो ऐसा लगता था मैं किसी एलियन वर्ल्ड से यहाँ फेका गया हूँ ।

यहां के लोगों का कतार प्रेम मुझे बहुत प्रभवित करता है । शायद भीड़ के बोझ ने यह सामूहिक समझ बना दी है की कतार से सुविधा होगी ।बस के लिए लाइन, ऑटो के लिए लाइन , मुतारी के लिए लाइन और उन लाइन को स्वयं पालन करते लोग ।

मैं एक मध्यवर्गीय अपार्टमेंट के एक फ्लैट में अपना कुनबा समेटे जिंदगी के रेशमी खुरदरे पालो को सहलाते हुए ठीक ठाक गुजर कर लेता हूँ ।मेरे बगलवाली फ्लैट में मुछड़ काका अपनी स्वर्गवासी पत्नी की यादों को संजोये दोनों बहुओं और तीन बेटों के साथ जिंदिगी को 1 आर के में घसीट रहे हैं । काकी के गुजरने के बाद से उनकी जिंदगी अर्थहीन सी हो गयी है । सुबह आँख खुलती है तो सोचते हैं चलो एक और रात कट गई । क्योंकि उनके होने या नही होने से किसी को कोई फर्क नही पड़ता सिवाय चिंटू के जो उनका बड़ा लाडला पोता है ।

चिंटू अब लगभ दस साल का हो गया है लेकिन अपनी उम्र से ज्यादा समझदार और उसके घर के सारे सदस्य की पहचान उसके उपसर्ग से होती है । मसलन कि चिंटू के पापा , चिंटू की माँ, चिंटू की बहन , चिंटू की चाची और सब कुछ ।

उन सभी पात्रो में मेरी बशेष दिल्चस्पी चिंटू की चंचल , बड़बोली और खूबसूरत चम्पा चाची में है ।

इसका अन्यथा अर्थ न निकाला जाए तो बेहतर होगा ।

325 फिट के 1आर के फ्लैट में 3 बेटे दो बहु और 1 पोता 1 पोति के साथ हमारे मुच्छड़ काका 

रहते हैं । सामान्यतः उनका परिवार बडा ही सुसंस्कृत और प्रैक्टिकल फैमिली की श्रेणी में आता है । कभी भी इनका कोइ झगड़ा या मनमुटाव नही जो बंद दरवाजे से बाहर निकल पाता है।लेकिन उनकी समस्या भी टिपिकल मुम्बई के संयुक्त परिवार की थी जिसमे एक से ज्यादा विवाहीत जोड़े रहते है जो अभी वंश परंपरा बढाने की जिम्मेदारी पूरी करना चाहते हैं।यह स्वभाविक भी है और अनिर्वाय भी ।

कहते हैं न आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है ।जबतक काकी जिंदा थी और दो बहुएं थी किसी बाहरी व्यक्ति को इस व्यवहारिक समस्या का भान भी नहीं हुआ ।चिंटू की चाची की शादी को पांच साल हो गए लेकिन अभी तक पाँव भारी होने की खबर नही मिली तो यह चर्चा का विषय बन गया और धीरे धीरे पुरुष समाज तक भी पहुच गया ।

जब ऐसी बात निकलती है तो कारणों पर भी चटकारे लीए जाते हैं ।चिंटू की चाची के माँ नही बन पाने का कोई मेडिकल कारण नही था । उसने घोषणा कर दिया था कि जबतक उनका हसबैंड अपना अलग फ्लैट नही लेगा वो माँ नही बनेगी ।

बात के बिस्तार में जब महिला मंडली घुसी फिर यह भी पता चला की चिंटू के छोटे चाचा ने तो शादी नही करने की भीष्म प्रतिज्ञा ली है और कारण भी लगभग चिंटू की चाची से मिलता जुलता ।

आज कल रियल इस्टेट का भाव बढ़ जाने के कारण चिंटू के परिवार के किसी भी सदस्य की बात तो छोड़ दीजिए परिवार का कंबाइंड इनकम भी इतना नहीं है कि वो लोग बड़े घर का ई एम आई अफ़्फोर्ड कर सकें ।

एक रोज मेरी पत्नी मेरे पास आयी और बड़े धीर गंभीर अंदाज में बोली आपको अब 3बी एच के का फ्लैट खरीदना पड़ेगा । मैं सोचने लगा अचानक मोहतरमा को फ्लैट खरीदने का बुखार कहाँ से चढ़ गया क्योंकि हम पति- पत्नी और दो बेटों के लिए तो अपना फ्लैट पर्याप्त है ।

मैने जब प्रश्नवाचक दृष्टि उनपर डाली तो उन्होंने कहना शुरु किया । तू मर्दों को तो जरा भी अक्ल नही है औरतों को किन किन समस्याओं से दो चार होना पड़ता है । तुमको मालूम भी है क्या मुच्छड़ काका के घर आजकल कितना तनाव चल रहा है । मैने न में सिर हिला दिया ।

यही तो, सारी घरेलू अंदरूनी बातों को हम औरतो को ही झेलना और सम्भालना पड़ता है । तुमको मालूम है उनकी बहुओं को अपने दाम्पत्य सुख के लिए ले देकर एक किचेन ही जगह है जहां का वो दरवाजा बंद कर सकती हैं ।

इसमे क्या समस्या है और क्या कहना चाहती हो जरा खुल कर बताओ । उसने कहा"जब तक 

काकी ज़िन्दा थी उन्होने नियम बना रखा था जिसको किचेन का दरवाजा बंद करने की चाहत या जरूरत हो वह उसदिन खाने में हाथ नहीं बाटाएगी । वह सबका खाना हो जाने के बाद कीचेन कि सफाई करेगी और यह उसके पति के लिए संकेत होगा । लेकिन अब बडी बहु ने उस नियम का पालन ईमानदारी से करना छोड़ दिया है । आखिर चिंटू की चाची के भी अपनी जरूरते और अरमान है । लेकिन उसका आदमी एकदम भोलानाथ है । वह भाभी से ऐसी बाते करने में कतराता और शर्माता है फिर भी एक जवान औरत के लिए यह समस्या तो है न!

अंतरंग पलो को तरस्ते औरत के दिल को तुम मर्द जाती क्या समझोगे । बेचारी अब तो यह सोचने लगी है कि उसकी शादी भी हुई है कि नहीं ।आप कान खोल कर सुन लो मेरे घर इस तरह की समस्या नही चाहिए की दरवाजे बंद करने के लिए भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़े । मेरी बहु आने से पहले 3 बी एक के चाहिए नहीं तो आपका भी हुका पानी बंद समझो ।

मैं तब से उलझन में हूँ की मैं क्यों चिंटू की चाची के सजा का हकदार बन गया । लेकिन महानगर के जीवन मे यह प्रश्न विचारणीय जरूर है ।



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