Dr Jogender Singh(jogi)

Children Stories Others


4.0  

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छोटा सा हसीन सपना / ई रिक्शा हो अपना

छोटा सा हसीन सपना / ई रिक्शा हो अपना

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प्रशांत ने गर्व भरी नज़रों से झोंपड़ पट्टी की तरफ़ देखा। मुस्कान अपनी झोपड़ी से बाहर निकल रही थी। प्रशांत ने अपनी गर्दन को तान शान से मुस्कान को निहार कर ई रिक्शा का हॉर्न बजाया। प्रशांत दस साल का दुबला साँवला सा लड़का, अपने पापा का रिक्शा ले छोटे भाई / बहन को घुमा रहा था। चार भाई / बहनों में प्रशांत सबसे बड़ा। हॉर्न की आवाज़ मानो मुस्कान ने सुनी ही नहीं। प्रशांत ने फिर से देर तक हॉर्न बजाकर ई रिक्शा घुमा लिया।  

“ तेज चलाओ भैया, पीछे बैठी रीता बोली।  

“ अभी देखना कितना तेज चलाता हूँ, प्रशांत ने एक्सिलेटर को घुमाया।

” अरे कलुआ ! सम्भाल कर पूजा अंदर से चिल्लाई, अभी तेरे पापा को बताती हूँ। पूजा फिर से पेट से थी। चौथा महीना चल रहा था। सबसे छोटा प्यारे अभी एक साल का है। गाँव से शादी के बाद पूजा रमेश की बाँह थामे आँखों में रंगीन सपने लिए कानपुर तो आ गई, पर रेलवे पटरी के किनारे बसी झोपड़ पट्टी देखते ही उसके सपने हवा में उड़ गए। सारी सहेलियाँ कितना जल रही थी उसके रिश्ते से। राधा ने तो कई बार बोल भी दिया “ पूजा तेरे खूब मज़े हो गए , शहर में रहोगी, सिनेमा / बाज़ार सब मिलेगा तुम्हें। हम लोगों को तो वही चूल्हा, गाय और खेत। अपनी / अपनी क़िस्मत है।" 

“अरे तो मेरे पास आ जाना घूमने, कितनी शान से बोली थी पूजा। देखते / देखते बारह साल बीत गए। वो किसी को भी अपने घर नहीं बुला पायी। किस मुँह से और क्या दिखाने बुलाती। एक दस गुणा बारह फ़ीट का कमरा दिखाने ? या सड़क किनारे धुआँ छोड़ते चूल्हे को दिखाने। उसे गाँव का वो खुला आँगन बहुत याद आता। रमेश रिक्शा चला कर किसी तरह घर चला रहा था। पूजा ने बहुत कोशिश की कुछ पैसा बचा कर एक ओटो ख़रीद लिया जाए। पर कभी बीमारी में तो कभी स्कूल की कॉपी / किताब और वर्दी में सारी बचत खप जाती। थक हार कर बापू से कुछ मदद ले कर ई रिक्शा ख़रीद लिया। शायद कुछ कमाई बड़ जाए।  

यूँ तो पूजा अब अपनी सहेलियों से मिलने से बचती थी। वो सब गाँव में भी ख़ुश थी, कम से कम पूजा के मुक़ाबले तो ज़रूर। फिर भी कभी शादी / ब्याह में मिलना हो ही जाता। पूजा सब की बातों में बस हाँ/ हूँ करती रहती।

बस रमेश को किसी नशे की आदत नहीं थी, यही सोच कर पूजा ख़ुश हो लेती।

“ एक कप चाय बना दो , रमेश खटिया से उठते हुए बोला। फिर जाता हूँ स्टेशन। ई रिक्शा चार्ज करवाना है।  

पूजा ने पतली लकड़ियाँ चूल्हे में डाल माचिस से काग़ज़ जलाया। “पता नहीं किसको गैस चूल्हा मिला ? अपनी तो क़िस्मत में धुआँ ही लिखा है।

“ मोदी जी दे रहें है सबको गैस चूल्हा, अपना भी नम्बर आयेगा। एक बार राशन कार्ड बन जाए बस। “बाबू से मेरी बात हुई है। ”

रहने दो, उस चोर बाबू को। बिना रिश्वत वो कुछ नहीं करेगा, दो साल से तो टहला रहा है तुम्हें। पूजा चाय देती हुई बोली।

“ थोड़ी जेब गरम कर दूँगा , अब तो ई रिक्शा भी आ गया। इस महीने कुछ पैसे ज़रूर बचा लूँगा। फिर हो सकता है प्रधानमंत्री आवास योजना में छोटा सा पक्का घर भी मिल जाये। रमेश मानो सपने में बोल रहा था। उसकी आँखों में एक सुकून भरी चमक थी।

तभी प्रशांत ई रिक्शा ले कर आ गया। “तुम्हें मना किया न रिक्शा चलाने को। रमेश ने प्रशांत को डाँटा। होमवर्क कर लिया तुमने ?

अभी कर लूँगा बापू , यह बहुत तेज चलता है। मैं भी बड़ा होकर ई रिक्शा लूँगा। प्रशांत इठलाते हुए बोला।

चटाक। पूजा ने एक थप्पड़ प्रशांत को जड़ दिया। जा, होमवर्क कर और अगर इस बार नम्बर कम आए तो समझ लेना।

प्रशांत को समझ नहीं आया कि महीने भर पहले जिस ई रिक्शा के आने पर मिठाई बँट रही थी, अब एक और ख़रीदने की बात पर मार पड़ रही है। वो चुपचाप अपनी कॉपी खोलकर होमवर्क करने लगा। “पर एक ई रिक्शा तो मैं ज़रूर ख़रीदूँगा, मेरा अपना ” प्रशांत धीमे से मुस्कुरा रहा था। कॉपी में ई रिक्शा का चित्र बनाकर।


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