बालिका मेधा 1.20
बालिका मेधा 1.20
कक्षा 9 में आने पर मैंने विज्ञान संकाय में अध्ययन का विकल्प लिया था। इससे मेरे सेक्शन में कई नई लड़कियाँ आ गईं थीं। उनमें से एक का नाम पीयूष था। वह पढ़ने में ठीक होने के साथ बिंदास किस्म की लड़की थी। पढ़ाने वाले टीचर्स से उसके प्रश्न - उत्तर नितदिन चला करते थे। कुछ दिन ऐसे ही बीते थे। पीयूष, हम कुछ लड़कियों को एक दिन ब्रेक में चहकते हुए बता रही थी -
"यार! मैथ्स वाले सर पर तो मेरा दिल आ गया है। मुझे लगता है वह मुझे मैथ्स के नहीं प्रेम के पाठ पढ़ाया करें।"
हम सब लड़कियाँ इसे मजाक समझ कर हँस दिए थे। यद्यपि पीयूष का कहा यह मजाक नहीं था, यह समझने में क्लास को अधिक समय नहीं लगा था। पीयूष के मैथ्स टीचर से मिलते गुण-धर्म हमने अनुभव किए थे। हमारे अचरज का विषय यह था कि मैथ्स टीचर जो कि हमसे दुगुनी उम्र के थे, वे भी पढ़ाते हुए पीयूष को ही अधिक निहारा करते थे। वे पीयूष से पूरी क्लास के सामने हँस हँस कर प्रश्न-उत्तर किया करते थे।
एक दिन तो अति हो गई जब बोर्ड पर हल किए जा रहे, प्रॉब्लम में एक राशि को 2.5 से गुणा करने की जरूरत आई। तब मैथ्स टीचर ने पीयूष से पूछा - "पता है पीयूष, 2.5 को हिंदी में क्या कहते हैं?"
पीयूष ने कहा - "नहीं पता सर, आप बताईये।"
मैथ्स टीचर ने कहा - "2.5 को ढाई भी कहते हैं। तुमने सुना नहीं एक कहावत है, “ढाई अक्षर प्रेम के पढ़े सो पंडित होई”?"
मैथ्स टीचर की इस बात से उत्साहित होकर पीयूष ने कहा -" सर, क्या आप मुझे ढाई अक्षर प्रेम के पढ़ाएंगे?"
अब तक मैथ्स टीचर को समझ आ गया था कि वे टीचर की भूमिका से अलग कुछ करने की गलती कर रहे हैं। उन्होंने स्वयं पर नियंत्रण करते हुए कहा - नहीं, मेरा विषय तो मैथ्स पढ़ाने का है।
फिर दो दिन बाद हमारी क्लास के मैथ्स टीचर को बदल दिया गया था। उनकी जगह संचिता मैम पढ़ाने लगीं थीं। हमें पता चला था कि उस दिन किसी लड़की के पास मोबाइल फोन था। जिसमें उसने ढाई अक्षर वाली बात की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर ली थी। घर में यह उसने अपने पैरेंट्स को सुनवाई थी। उसके पेरेंट्स ने इसकी शिकायत प्रिंसिपल से की थी। तब प्रिंसिपल ने टीचर को हटाने की कार्यवाही की थी। इसके बाद के अवकाश पर मैंने मम्मा से यह पूरी घटना कह सुनाई थी। सुनने के बाद मम्मा ने कहा -
"पहले ऐसे प्रसंग कभी कभी कॉलेज में हुआ करते थे। अब लगता है, बच्चों के समय से पहले बड़े हो जाने से यह स्कूल में ही होने लगे हैं। "
मैंने पूछा - "मम्मा, मुझे लग तो रहा है कि यह गलत है। पर समझ नहीं पा रही हूँ कि गलत क्यों है। क्या आप मुझे समझाएंगी?"
मम्मा ने कहा - "इस उम्र में पीयूष की ओर से एक तरह से यह स्वाभाविक बात मानी जा सकती है। मुझे इसमें पीयूष की गलती नहीं लगती है। यह मैथ्स टीचर की गलती है जो तुम्हारे बताए अनुसार 28-30 वर्ष का है। यह परिपक्वता की उम्र मानी जाती है। इस उम्र में टीचिग तरह के दायित्वपूर्ण प्रोफेशन में रहने वाले व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी का पता होना चाहिए।"
मैंने उनके कहने के बीच में ही पूछ लिया - "मम्मा आपने कभी बताया था कि 21 वर्ष के पूर्व तक किसी लड़की को प्रेम-व्रेम में नहीं पड़ना चाहिए। पीयूष तो अभी 14 की है।"
मम्मा ने धैर्य सहित कहा - "मैं पीयूष की भी बात करुँगी। पहले मैथ्स टीचर वाली बात तो पूर्ण कर लूँ।"
मैंने मुस्कुरा कर कहा -" हाँ मम्मा। "
मम्मी ने कहा - "किसी टीचर को इस बात का भली भांति ज्ञान होना चाहिए कि शिक्षक के रूप में उसका कर्तव्य एवं धर्म अपने शिष्य-शिष्याओं को ज्ञान प्रदान करने का होता है। शिष्य-शिष्याएं, शिक्षक से कम समझ वाले और कम ज्ञानी होते हैं। अगर कोई विद्यार्थी गलती करे तो शिक्षक को उसकी गलती सुधारने में सहायता करनी चाहिए। विधार्थी को आगे गलती करने से रोकना चाहिए।"
मैंने कहा - "मम्मा लगता है टीचर ने यह बात बाद में समझ ली थी। तभी तो बाद में उन्होंने पीयूष से कहा था ‘नहीं मेरा विषय तो मैथ्स पढ़ाने का है’।"
मम्मा ने कहा - "यह उस टीचर का देर से समझ पाने से हुआ हो सकता है अथवा डर के कारण भी हुआ हो सकता है। "
मैंने कहा - "मम्मा, टीचर को किस बात का डर रहा होगा।"
मम्मा ने कहा - "मेधा यह तो तुम ही समझ गई होगी। तुम ही बताओ।"
मैंने सोचा फिर कहा - "टीचर को जिस बात का तब डर हुआ होगा, वह उन्होंने शिकायत के बाद भुगत लिया। अर्थात उन्हें पीयूष जिस क्लास में छात्रा है, उससे हटा दिया गया।"
मम्मा ने कहा - "मेधा तुम सही कह रही हो। मुझे उनके डर का एक और उससे बड़ा कारण भी समझ में आ रहा है।"
मैंने पूछा - "वह क्या मम्मा?"
मम्मी ने कहा -" यह तो तुम और विद्यार्थी जान और देख रहे हैं कि टीचर को हटाया गया है। किंतु परदे के पीछे का सच यह रहा होगा कि किन्हीं पेरेंट्स से शिकायत मिलने के बाद, स्कूल प्रिंसिपल ने टीचर को अपने कमरे में बुलाकर डाँटा और धमकाया होगा कि उन्हें, टीचर की नौकरी से निकाल दिया जा सकता है। साथ ही आगे ऐसी कोई गलती नहीं करने के निर्देश के साथ उन्हें तुम्हारी क्लास से हटा दिया गया है।"
मैंने कहा - "मम्मा आप जो कह रहीं हैं मुझे सच लग रहा है। आप जीनियस हो मेरी मम्मा।"
मम्मा मुस्कुराई थीं। फिर मैंने उनसे पूछा - "पीयूष को इस बात के लिए आपने गलत नहीं कहा है। उसके लिए आपका विचार क्या है?"
मम्मा ने कहा - "पीयूष की जगह इस प्रसंग में मैं तुम्हें देख रही हूँ। मैं सोच रही हूँ, तुमने ऐसा किया होता तो हम पेरेंट्स तुम्हें कैसे समझते और समझाते।"
मैं मम्मा को मुँह ताकने लगी थी कि वे आगे क्या कहती हैं।
(क्रमशः)
