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सोमवार रविवार जिनके मंगल हम हों पूरी हों सब जगह योग्यता तय हों राजनीतिज्ञों कि खलास हों सबकी कैसे हों हमारे दिन जिनके पास नहीं हों आँसू हिन्दीकविता जिनके पास आँसू पुरानी पेंशन बहाल हों हौसले बुलन्द आँख व्यर्थ

Hindi हों Poems