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हिन्दी कविता लोग जमाने गलतफहमी जोकर फर्क दर्द यारों समझने के लिए बहुत कुछ हैं परवरिश फितरत कहूँ अनजाने हिम्मत धूल खुद कहते सीने मज़ाक अलग

Hindi समझने Poems