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फितरत धूल तमाशा समझने के लिए बहुत कुछ हैं कहूँ पर कोई समझना नहीं चाहता..... खुद यारों कहते लोग गलतफहमी फर्क जमाने सीने जिंदगी दर्द परवरिश जोकर हिम्मत अनजाने

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