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धूल समझने के लिए बहुत कुछ हैं खुद तमाशा यारों परवरिश अनजाने गलतफहमी हिम्मत जोकर कहते सीने दर्द कहूँ फर्क जिंदगी जमाने अलग लोग हिन्दी कविता

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