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एकाग्रता के ध्यान अपनाएँ सुबह रात वहीं शाम वहीं सुबह ढूंढे करार आस्वाद वो और मैं योग करे स्वस्थ रहें हिन्दीकविता सुकून मिलता हैं लिखता हम और वो हिंदी कविता वहीं ज़मीन करार नहीं मिलता मुरझाती रूह को मानो नवजीवन मिलता है फिर दर्द पुराना नई महक लेकर खिलता है योग से मन तन को लाभ मिलता नहीं मिलता मदद आजकल

Hindi मिलता Poems