तुम हो पराकाष्ठा उस असीम की, जिसे हम कहते हैं चमत्कार ही...! तुम हो पराकाष्ठा उस असीम की, जिसे हम कहते हैं चमत्कार ही...!
इस कविता में एक कवियत्री उस भक्त का वर्णन किया है जो राम प्रेम में लिप्त है। इस कविता में एक कवियत्री उस भक्त का वर्णन किया है जो राम प्रेम में लिप्त है।
फिर कैसा? रोना-धोना? फिर कैसा? रोना-धोना?
एक पिता के एक पुत्र से विमुख होने से पहले एक आखरी सांस ले लेने देना मां। एक पिता के एक पुत्र से विमुख होने से पहले एक आखरी सांस ले लेने देना मां।
अपना तन-मन बलिदान करो, तभी वीर कहलाओगे। अपना तन-मन बलिदान करो, तभी वीर कहलाओगे।
सारे जग का हे उबारा तू दुखियों का सहारा सारे जग का हे उबारा तू दुखियों का सहारा