STORYMIRROR

सजा धरती मृग मरीचिका गोद मन ख़्वाहिश कोई बहला सके हमें न सब उत्कृष्ट खुद हे आर्य वीरों! जागो होठों अच्छी कविता घर सागर विरोध ज्ञान दिल ध्यान अंतर्मन उपवन

Hindi बहला Poems