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अंतर्मन कोई बहला सके हमें न घर गोद सजा ख़्वाहिश विरोध दिल माहौल सच ध्यान खुद मन भुला होठों धरती सागर हे आर्य वीरों! जागो रौनक सब उत्कृष्ट

Hindi बहला Poems