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प्रभात भयानक फुटपाथी जिंदगी घोर अंधेरा वेदना जीवन आन पड़ी है आवाज़ घोर गरीबी हिन्दीकविता रात दहकती विपदा अंतस फैसला प्रेम के घोर एकांतिक क्षणों में रची एक मांसल कविता... घाव मजलूम आदमी मर्यादा डरावनी

Hindi घोर Poems