दिल के अंतस से उपजी एक कविता..... दिल के अंतस से उपजी एक कविता.....
संग कैसे द्वय को तुष्ट करें संग कैसे द्वय को तुष्ट करें
कभी शक्ति रूप में रक्तबीज कोरोना का संहार करो। कभी शक्ति रूप में रक्तबीज कोरोना का संहार करो।
भीतर उसके कुछ दरकता जा रहा था शायद ईमानदारी से किया हुआ प्रेम ! भीतर उसके कुछ दरकता जा रहा था शायद ईमानदारी से किया हुआ प्रेम !
यही जचेंगे हम पे, ये तो ज़िन्दगी के गहने हैं। यही जचेंगे हम पे, ये तो ज़िन्दगी के गहने हैं।
देखा है आँखों के सामने संकेतक का खेल पर नापी नहीं सच्चाई किस मापक की मदद से चाहिए विचारमंथन चाहिए ... देखा है आँखों के सामने संकेतक का खेल पर नापी नहीं सच्चाई किस मापक की मदद से चा...