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मनुष्य परिष्कृत रूप परमात्मा पुरानी धरोहर ढलने सुकून हमेशा प्रेम सच्चा धर्म सम्भव उम्मेद मजा जीवन वक्त के अनुरूप सृष्टि मंजिल भाव सदा परमार्थ का सरल संग संग्रह के आलय

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