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Sunita Shukla

Others


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Sunita Shukla

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ये बचपन बड़ा निराला है

ये बचपन बड़ा निराला है

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तन माटी लिपटता बचपन, 

मन मीलों उछलता बचपन ।

पेड़ों पर चढ़ता-उतरता बचपन, 

लट्टू सा फिरता बचपन ।।


ये चंचल चपल चितोला है, 

गिल्ली-डंडा और सितोला है।

ये बचपन बड़ा निराला है ,

मनमौजी और ये आला है।।


परियों से चेहरे इनके, 

और कलियों सी मुस्कान है ।

रूठना और मनाना शान है, 

इनकी ग़म से न कोई पहचान है।


अपने और गैर की फिकर नहीं, 

चेहरे पर कोई शिकन नहीं ।

धर्म और जात का भेद नहीं, 

संस्कृत, पुराण और वेद नहीं ।।


ये धवल दुग्ध सा निर्मल है, 

ये रजत चँँद सा शीतल है ।

ये बचपन बड़ा निराला है ,

मनमौजी और ये आला है।।


अमराई की ठंडी छाँवो में, 

पगडंडी, राह और गाँवों में ।

भर के सपने कितने आँखों में, 

छिप जाता अकसर शाख़़ों में ।।


कोयल सा कूकता प्यारा बचपन, 

खुशियों को ढूूंढता न्यारा बचपन ।

ये बचपन बड़ा निराला है, 

मनमौजी और ये आला है ।। 


       

       



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