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Sajida Akram

Others

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Sajida Akram

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यादें

यादें

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भूली बिसरी यादें,

क्यों झांके अपने ,

अतीत के फड़फडाते,

पन्नों को, जहाँ बसी हैं,

फिज़ूल की कड़वी यादें,

भूली बिसरी यादें।


उन यादों को कुरेदने से,

इंसान तू पायेगा,

सिर्फ कड़वी यादें।

अतीत की पुरानी यादों,

भूलो को बिसार दे,

आगे की सुध लें।


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