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Shailaja Bhattad

Others

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Shailaja Bhattad

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वसंत उत्सव

वसंत उत्सव

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पतझड़ का हुआ अंत

आया अब वसंत।

छेड़ी प्रकृति ने सुरो की तान

गूंज उठा भवरों का गान।

झूम उठा जंगल सब संग

डूब गए हैं सब अपनों के रंगों में रंग ।

तन मन में उठी नई उमंग

आई जीवन में तरंग।

सबको सबका साथ है

वसंत में यही तो कुछ खास है।


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