वर्तमान
वर्तमान
कोई जीता जीवन अपना हर पल,
और कोई खोता अपना हर पल,
यह तो अपने ही समझ का फेर है कहीं दिन है तो कहीं अंधेर है,
उस कल की राह तक कर,
जो आज अपना बिताते हैं,
उस आज को वह भरपूर नहीं जी पाते हैं,
वर्तमान ही सच्चाई है बाकी तो सब वक्त की दुहाई है,
वर्तमान के आज को जो समझेगा वही भविष्य के कल को संवारेगा,
जो अपना प्रतिपल आज बिगाड़ेगा, वह क्या कल के पल निखारेगा,
पलों की गिनती में घड़ी बीत जाएगी, यह बीती घड़ी फिर से नहीं आएगी,
अतीत कुछ नहीं दे पाया है,
भविष्य कल्पनाओं से सजाया है,
वर्तमान ही वह धार है,
जिस पर टिका यह संसार है,
यह संसार हमें घूमता सा प्रतीत होता है,
जो कभी आज था, अतीत महसूस होता है,
वर्तमान में बीता हर पल अतीत का निर्माण करता जा रहा है,
अतीत और भविष्य की परेशानियों का एक जहान बनता जा रहा है,
जिसमें वर्तमान एक सवाल बन कर सामने आ रहा है ।।
