वो समय
वो समय
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एक समय था जब बच्चे सिर्फ बच्चे हुआ करते थे
आंगन बड़ा जहाँ वो नए सपने संजोया करते थे,
आज अपनी खिचड़ी अलग ही पकाया करते हैंI
खाना कहीं भी बने हो संग- संग खाया करते थे,
भंडारा खाने के लिए लंबी लाइन लगाया करते थे,
कहाँ वो दिन आज तो सब ईद का चाँद लगता हैI
सब मिलकर बच्चों का प्यारा नाम रख लिया करते थे
बच्चों के नाम गोलू , मोलू ही सभी को अच्छे लगते थे,
आज नाम रखना नाकों चने चबाना जैसा लगता हैI
