वो दिन याद आते हैं
वो दिन याद आते हैं
बचपन के वो दिन याद आते हैं
वो दिन जब आंखों के इशारों में ही मम्मी हमारी शैतानियां पहचान लिया करतीं थीं।
वो दिन जब उदास चेहरा देखकर पापा हमारा मनचाहा तोहफा ला दिया करते थे।
वो दिन जब जिद पूरी करवाने के लिए हम खाना छोड़ दिया करते थे,
वो दिन जब रोते हुए हम पूरे घर को सर पर उठा लिया करते थे।
वो दिन जब हमें मनाने के लिए दादा दादी हमारे पीछे पीछे आया करते थे।
वो दिन जब वो हमारे लिए हमारे मम्मी पापा को डांट लगाया करते थे।
वो दिन जब दीदी से लड़ने पर हम मम्मी से उसकी डांट लगवाया करते थे।
वो दिन जब भाई के बाल खींचने पर पापा से पिटाई लगवाया करते थे।
वो दिन जब बिना बताए हम धूप में खेलने निकल जाया करते थे।
वो दिन जब चोट लगने पर घर में गुपचुप घुस जाता करते थे।
वो दिन जब हम बच्चे हुआ करते थे।
वो दिन जब हम मस्ती में जिया करते थे।
वो दिन जब हम जिम्मेदारी को नहीं समझा करते थे।
वो दिन जब हम खुद में ही जिया करते थे। सच में वो दिन बहुत याद आते हैं ।
