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Dr. Madhukar Rao Larokar

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तुम अटल थे अटल ही रहे

तुम अटल थे अटल ही रहे

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तुम अटल थे अटल ही रहे

अंत तक ध्रुवतारे, की तरह।


भारतीय राजनीति की

उठा-पटक, जोड़-तोड़ को

ना स्वीकारा, ना करने दिया।

जीवन में प्रभू, राम की तरह

राजनीति में मर्यादा व

शुचिता को स्थान दिया।।


होम किया अपना जीवन

देश व जनता के लिए।

अन्याय, असमानता की खिलाफत की

शोषितों के मसीहा बन

जिया, सिर्फ देश के लिए।।


तुमने हमेशा मान, बढ़ाया देश का

अपने कर्मों और विचारों से।

निर्भीकता, स्पष्टता व सत्यता का

दामन न छोड़ा, राज की नीतियों से।।


तुम रहे जितेन्द्रिय योद्धा न

झुकने ना, समझौता करने वाले।

बन दर्पण चेहरा दिखाया, नेताओं को

कथनी करनी में, भेद न करने वाले।।


विश्व में मान बढ़ाते

सदैव ही तिरंगे का।

भाषा, जात, मज़हब को

समान समझ परचम लहराया

भारतीयता का।।


कोटिशः नमन वंदन, तुम्हें हमारा

गुणों के हिमालय रहे तुम।

न हुआ ना होगा, तुम जैसा लाल

सदियों दिलों पर राज करोगे तुम।।


तुम अटल थे अटल ही रहे

अंत तक ध्रुवतारे की तरह।।


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