STORYMIRROR

Bhavna Thaker

Others

1  

Bhavna Thaker

Others

तुझको पुकारूँ

तुझको पुकारूँ

1 min
134

थी मेरी चाहत की सीमा कितनी लघु संगीन

तेरे एक कदम की इंगित से विराट बनी मनमीत.! 


मूक वीणा सी मौन प्रीत बह रही थी उर आँगन , निर्वाण किया तेरी एक नज़र ने प्रीत बज उठी सस्मित.! 


सीमा हीन शून्य में मंड़राती अभिलाषा निज मन में, तुमसे प्रीत जगते ही हुई प्रतिबिम्ब मेरी हर मनसा.! 


आँसू भरी अमिट लकीरें पड़ी हुई थी आँचल में, प्रेमसभर एक छुअन तेरी जीवित कर गई सहसा.! 


लिख दी मैंने आसमान के पथ पर सपनो की बातें, इनको मिटा ना पाएगी ओस के आँसू से रातें.! 


नैन पसारे राह निहारूँ पल-पल प्रियतम तुझको पुकारूँ साँस अधीर और उतावली है हर धड़कन की तान

सजल आँख में इंतज़ार की लिए प्रेमिल आस।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन