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Tanmay Mehra

Others

4.3  

Tanmay Mehra

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तेरे नाम से उलझ कर

तेरे नाम से उलझ कर

1 min
471



कुछ सपने थे जो बिखर गये

कुछ अपने थे जो बिछड़ गये

ये ज़िंदगी क्या है ? एक सूखा

हुआ पेड़ ही तो है


जो एक हवा का झोंका आये

और गिर जाये

क्योंकि इक ना इक दिन

सब को ही इस ज़िंदगी की

रेलगाड़ी से

उतर का चाँद सितारों में खो

जाना है


अब जाना ही है इक दिन तो

क्यों ना हम इस ज़िंदगी को ही

तेरे नाम से उलझ कर जी ले

कम से कम तू नहीं होगी इस

सफर में तो तेरी बातें तो होंगी

जो किसी रोज़ तुम से हुआ

करती थी.. 

 



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