"सहमा सा मन है"
"सहमा सा मन है"
सहमा -सा-मन है,
आज एक नई अनुभूति,
जब कहा गया है, मुझसे,
ईश्वर रुपी लेडी डॉक्टर ने,
मैं "माँ" बनने वाली हूँ,
हसूँ या रोऊं ।
करुं मैं, क्या करुं
जब लगे मुझे मेरी ही,
काया से आने वाली है,
मेरी ही प्रतिबिम्ब,
सहमा-सा-मन है,
ईश्वर की अनमाेल
देन को, मैं सहेजने,
लगी, जो अल्हड़पन,
था, ऊंची -नीची राहों पर,
चलने लगी संभल कर,
अंदर अपने जब आने लगा
बदलाव, मन में
ख़ुशियों की फुहारों से,
मध्यम-मध्यम भीग कर
तरबतर हो गया मन।
कभी मेरे अंदर की नन्हीं,
"जान" से मैं अकेले में बातें
करती, तुम से हर सांस और,हर
पल बस यही पुछती तुम ठीक
हो ना, ठीक हो ना।
ईश्वर से तुम्हारी आने की,
जन्म की सुविधा प्रार्थना करती,
धीरे-धीरे तुम्हारा बढ़ना,
कभी मेरी गर्भ में ,
घूमना, कभी नन्हें से,
पैरों से हलचल मचाना ,
पैरों से मारना, बड़ा रोमांचित ,
कर जाता।
मैं भाव-विभोर हो जाती,
ईश्वर की अनमोल देन,
को तुम्हें पा कर
ईश्वर को धन्यवाद देती
बारम्बार....!
