STORYMIRROR

Jayantee Khare

Others

4  

Jayantee Khare

Others

रिश्तों का क़ायदा

रिश्तों का क़ायदा

1 min
263

उम्र भर का वायदा है

इश्क़ की यह इब्तेदा है


मुश्क़िलों का कौन साथी

सब की राहें तो ज़ुदा है


पूछते किससे पता हम

हर बाशिंदा गुमशुदा है


दिल मिले अब ना किसी से

सबकी फ़ितरत अलहदा है


ठोकरें खाकर ये जाना

थामता बस इक ख़ुदा है


मुस्कुराहट कौन देता 

सारी दुनिया ग़मज़दा है


कैसे रुकता वो मुसाफ़िर

जिसका जाना तयशुदा है


हैं मरासिम चार दिन के

सबकी मंज़िल अलविदा है


जेब जब फटती है गिरते

रिश्तों का यह क़ायदा है


Rate this content
Log in