रिहाई
रिहाई
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गुज़रे वक़्त में
जो मिली
वो थी उधार की
अपनी ज़िन्दगी से
तो मेरी अब
मुलाक़ात हुई
टूटते यकीं से
चुकता हुई
फ़िर
रिहाई
मिली क़ैद से
आज मेरी
ख़ुद के
वजूद से बात हुई
माना
ज़ख्म हजार हैं
रूह जो
आज़ाद हुई
सौ बार शुक्रिया
आज मेरी
ख़ुद के संग
रात हुई...
