STORYMIRROR

Chandresh Kumar Chhatlani

Others

2  

Chandresh Kumar Chhatlani

Others

प्यासी घटाएं

प्यासी घटाएं

1 min
159

ये पर्वत पे प्यासी घटाओं का मौसम,

आओ यहाँ पे खो जाए हम।

ये झरनों का संगम, गुलों सा है हमदम,

आँचल तले सो जाए हम।


सूरज की पहली किरण जगाये,

चाँद थपकी दे कर सुलाए,

ये चिनारों के पत्ते, बारिश की रिमझिम,

इस जहां में खो जाए हम।

ये पर्वत पे प्यासी घटाओं का मौसम...


हवाएं महकती चली जा रही,

बारिश की बूँदें गुनगुना रही,

ये किताबों सी मंजिल, बर्फ का दर्पण,

हौले से इनको छू जाए हम।

ये पर्वत पे प्यासी घटाओं का मौसम...


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन