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Anamika Vaish Aina

Others

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Anamika Vaish Aina

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पुरुष तुम

पुरुष तुम

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पुरुष तुम कर्तव्य निष्ठावान हो
माँ के नैनों के तारे औ'प्राण हो
घर से बाहर तक सारा बोझ ढ़ोते 
तुम ख़ुद में ही प्रतिभावान हो..

सब मुश्किलें हँस के गुजारे
बन जाते तुम सबके सहारे
आसान दिखाते हो स्वयं को
पर ज़रा भी नहीं आसान हो..
तुम ख़ुद में ही प्रतिभावान हो.. 

तुम बहन के लिए हो सितारे 
पिता के तुम ही साथी-सहारे 
सच ख़ुद को दांव रखकर भी 
तुम करते पूरे सबके अरमान हो
तुम ख़ुद में ही प्रतिभावान हो.. 

भाई की ताक़त और जान हो 
अर्धांगिनी की साँस-पहचान हो 
है अधूरे से ये भी तुम्हारे बिना 
हाँ मग़र इस बात से अनजान हो
तुम ख़ुद मे ही प्रतिभावान हो.. 

है लाख आशाएं सबकी जुड़ी
कोई न जाने तेरे दिल की कड़ी 
होती जरूरत जब भी किसी को 
तुम ही रखते सबकी आन हो 
तुम ख़ुद में ही प्रतिभावान हो.. 

अंतर्द्वंद से ही पल जूझते हो 
ख़ुद से ही लड़ रोज़ टूटते हो 
ख़ुद भले ही बिखर जाओ पर 
जोड़े रखने की हुनर की खान हो 
तुम ख़ुद में ही प्रतिभावान हो.. 

अनामिका वैश्य आईना 
लखनऊ 



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