STORYMIRROR

आलोक कौशिक

Others

2  

आलोक कौशिक

Others

पिता के अश्रु

पिता के अश्रु

1 min
185

बहने लगे जब चक्षुओं से 

किसी पिता के अश्रु अकारण 

समझ लो शैल संतापों का 

बना है नयननीर करके रूपांतरण 


पुकार रहे व्याकुल होकर 

रो रहा तात का अंतःकरण 

सुन सकोगे ना श्रुतिपटों से 

हिय से तुम करो श्रवण 


अंधियारा कर रहे जीवन में 

जिनको समझा था किरण 

स्पर्श करते नहीं हृदय कभी 

छू रहे वो केवल चरण 


Rate this content
Log in