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Devashish Tiwari

Others

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Devashish Tiwari

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निकल गया

निकल गया

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पहले तो बस लहू पे ये इल्ज़ाम था मगर,

अब आँसुओं का रंग भी कच्चा निकल गया...


कुछ और बढ़ गई हैं शजर की उदासियाँ,

शाख़ों से आज फिर कोई पत्ता निकल गया...


अब तो सफ़र का कोई भी मक़्सद नहीं रहा,

ये क्या हुआ कि पाँव का काँटा निकल गया...



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