नदिया
नदिया
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नदिया रानी बड़ी सयानी,
इतना क्यों भर लिया है पानी?
बहे खेत खलिहान हमारे ,
टूट गए हैं घर भी सारे ।
घर के सारे बिस्तर खोए,
हम रात में कैसे सोएं?
नदिया रानी बड़ी सयानी,
लाती तुम क्यों इतना पानी?
चूल्हा चौका डूब गया है,
किच्चन अपना टूट गया है।
भूखा हमको रहना पड़ता,
रोष तुम्हारा सहना पड़ता।
नदिया रानी बड़ी सयानी,
घटा नहीं क्यों बढ़ता पानी?
स्कूलों की राहें टूटी,
खेलों की भी आशा फूटी।
कैसे खेल रचाएंगे?
कैसे मौज मनाएंगे??॥२॥
