STORYMIRROR

meghna bhardwaj

Others

4  

meghna bhardwaj

Others

मेरे पिता के झुकते कंधे और माँ की झुर्रियाँ

मेरे पिता के झुकते कंधे और माँ की झुर्रियाँ

1 min
308

मेरे बाप के झुकते हुए कंधे

हर दिन मुझे जवान करते है।

माँ के चेहरे पर पड़ती हुई 

झुर्रियाँ, मेरी आँखें नम करती है।

चंचलता से मन, वीरान गति में जाने लगता है।

एकदम से एहसास होता है।

की बुढ़ापा जीवन का आख़िरी दौर होता है।

जीवन की सबसे मजबूत इमारत के गिर जाने का डर सताने लगता है।

जीवन से ये रौनक ख़त्म नहीं होनी चाहिए।

घर में माँ बाप की आवाज़ हमेशा आती रहनी चाहिये।

मेरी ख़ुशियों के लिए अपनी ज़िंदगी जिन्होंने बलिदान में लूटा दी

मेरे बाप की जेब कभी भी भरी हुई नहीं थी, माँ ने हर त्योहार पर अपनी पुरानी साड़ी ही सिली थी।


Rate this content
Log in