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meghna bhardwaj

Others

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meghna bhardwaj

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तू थोड़ी देर और ठहर जा

तू थोड़ी देर और ठहर जा

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आकर थोड़ा तुम भी ठहर जाओ

बात कहो कुछ अपनी, कुछ हमारी भी सुन जाओ

वक्त बर्बाद करने को तो पूरी ज़िंदगी पड़ी है

नज़र उठाकर देखो सामने ज़िंदगी खड़ी है

बस इक वक्त हमारे साथ भी रुक जाओ

तुझ पर थोड़ा ज़ोर होता तो हाथ पकड़कर रोक लेते 

तेरे जैसा कोई और होता तो हम इस कदर ना रोते

चाहत है तुझसे इतनी की

आँखें दीदार नहीं कर सकती 

लफ्ज़ बयान नहीं कर सकते।



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