मासूम बचपन
मासूम बचपन
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उसकी मासूम सी बातें
जाने कैसा जादू करती है
उसके संग संग मैं भी
बच्चा बन के रहती हूं,
अपने बीते बचपन से
उसके बचपन से मिलती हूं
वो रोता है,संग रोती हूं,
उसके संग संग हंसती हूं
बागों में उसके संग में
तितलियों को पकड़ती हूं
मां के साथ साथ मैं बेटे की
दोस्त बन कर रहती हूं।
