क्योंकि लड़के रोते नहीं।
क्योंकि लड़के रोते नहीं।
जब इंसान दुनिया में आता,
चाहे लड़का हो या लड़की,
दोनों बराबर का रोते,
कुछ का विचार,
ये मां-बाप का ध्यान आकर्षीत करने के लिए होता।
फिर जब दोनों बड़े होते,
तो परिवर्तन आता,
लड़की अधिक रोती,
और लड़का कम रोता,
अगर लड़का रोए,
हर कोई उसको चिढ़ाए,
अरे, क्या तूं लड़की है,
और अगर लड़की रोए,
तो सब बोलें,
लड़की है,
बेचारी रोए नहीं तो क्या करे।
ये सब बार बार सुनकर,
लड़के अपने आंसू रोकना सीख जाते,
और फिर अवल तो रोते नहीं,
या फिर कम रोते।
लगता! पुरुष को माना जाता,
ताकतवर,
रोना समझा जाता,
कमजोरी का चिन्ह,
शायद इसीलिए भी लड़के,
कम रोते,
या तो नहीं रोते।
