STORYMIRROR

Sukanta Nayak

Others

2  

Sukanta Nayak

Others

कुछ पल थे हसीन

कुछ पल थे हसीन

1 min
189

कुछ पल थे हसीन अब वो ना रहे, 

कुछ यादें थे अनमोल अब वो ना रहे। 


क्या आलम है क्या तकदीर है 

जो आ पहुँचे है इसे मकाम पर 

ना कोई कश्ती है ना कोई माझी, 

बस एक बिरानी राह है। 


सूखे पत्ते को तो फिर भी मिल जाती है शुष्क हवाओं की लहरें, 

में तो एक बंज़र जमीन हूँ गर्मियों से तपती रेत मैं।



Rate this content
Log in