कोरा कागज
कोरा कागज
बिन लिखा
टुकड़ा कोरे कागज का
क्या बिन लिखा है
सचमुच कोरा है
कुछ अहसास तो लिखे ही हैं
भविष्य की योजनाएं
कुछ कर गुजरने की चाहत
पढ़ता नहीं कोई उन छिपे अहसासों को
कोरा कागज जानता है
अभी वह कोरा है
एक बार लिख जाते ही
कोरा नहीं रहेगा
लिखा मिट नहीं पायेगा
मिटाने पर फट भी जायेगा
कोरा कागज कोरा नहीं
वह लिखता है रोज दुआ
परिवर्तन की बहार
मानवता के संदेश
जिंदगी के राग
गीत प्रेम के
कोरे कागज के अहसास
कोरा तो नहीं रखते उसे
कोरापन कोई रिक्तता नहीं
पर्याय है समर्पण का
ले लेखनी लगी लिखने खत
अल्फाज न मिले माशूका को
खत कोरा भेज दिया
पर कोरा मिला नहीं महबूब को
रिक्त हृदय का पर्याय बन गया
जो भरेगा उस इश्क के रंग में
रंग तो महबूब को ही भरने हैं
खत कोरा न रहा,
सचमुच पूरा हुआ
