कलम
कलम
ना होती यदि कलम तो भाव मन में रहते।
सारे के सारे हम ज्ञान से अंजान बने रहते।।
सिखाया इसने हमको ज्ञान को कुरेदना है।
संसार की गति से अंजान हम सब रहते।।
दुनिया की जानकारी हम किताबों से लेते ।
ना सजोती ये अक्षरों को तो पन्नें खाली रहते।।
उदासी और आक्रोश को हम दिल में दबाए रखते।
ना होती यदि कलम तो दर्द कैसे बाहर रखते।।
दुनिया के विद्वान सारे ज्ञान अपना कहां समेटते।
संसार के इतिहास से हम अब तक अंजान रहते।।
दूरी आसमां और चाँद सितारों की ना हमको ज्ञात होती।
कलम ने लिख कर काग़ज़ पे ये सलामत रहते।।
कलम ने काम हम सबका काम कितना आसान किया।
हर छोटी बड़ी बात को हम आसानी से कह देते।।
