।।कलाकार।।
।।कलाकार।।
कलाकार तो कलाकार है,
अपनी कला दिखाता है।
कभी रुलाता कभी हॅ॑साता,
कभी खुशी के गीत सुनाता है।
सभी कलाकार में अपनी,
प्रतिभा अलग ही होती है।
कोई नाचता कोई गाता,
किसी में कलम में प्रतिभा होती है।
किसी की प्रतिभा है पढ़ने में,
किसी की कला कलम में होती है।
खोजबीन की कला किसी में,
किसी ने कला परख की होती है।
बिना ज्ञान के कला न होती,
ज्ञान भी बहुत जरूरी है।
अभ्यास बिना भी कुछ न होता,
अभ्यास भी बहुत जरूरी है।
तुम भी अपनी कला पहचानो,
दुनिया को दिखलाओ खूब।
बन के खुशबू तुम फूलों की,
दुनिया को महकाओ खूब।
कलाकार होना मामूली बात नहीं है,
इसे निखारना पड़ता है।
प्रतिदिन उठ कर सुबह सवेरे,
इसे सॅ॑वारना पड़ता है।
