STORYMIRROR

Jyotiramai Pant

Others

4  

Jyotiramai Pant

Others

कहमुकरियां

कहमुकरियां

1 min
176

१

मुड़ मुड़ कर वो है फिर आया

आकर मुझ को बहुत सताया

जा नहीं सकती घर से बाहर

क्या सखि साजन? नहीं शीत लहर।


२

आकर मुझको ऐसे घेरे

राह न सूझे मन भटके रे

नज़रें हो जाती ज्यों कुंद

क्या सखि साजन? नहीं री धुंध।

३


मुझसे लिपट - लिपट जब जाए

उसे छोड़ फिर उठा न जाए

सारा दिन रहती अलसाई

क्या सखि साजन? नहीं रजाई।


४

मुड़ मुड़ कर वह फिर आ जाए

तन मन रोमांचित हो जाए

आके खोले द्वार किवाड़ा

क्या सखि साजन? नहीं री जाड़ा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन