Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Ahmak Ladki

Others Romance

5.0  

Ahmak Ladki

Others Romance

कैसा ज़हर है

कैसा ज़हर है

1 min
158


तेरे इंतज़ार में अजब सा असर है

मुझे ज़िंदा रखता है, कैसा ज़हर है


हर गली यहाँ तेरे घर को जाती है

कैसी भूलभुलैया, ये कैसा शहर है


दर्द उसे भी होता होगा आखिर

पत्ते से बिछड़ के रूठा शजर है


साहिल पर ही ठहरी है इंतज़ार में

समुंदर छूती नहीं, कैसी लहर है


तुम्ही से मोहब्बत, तुम्ही से पर्दा

हासिल कुछ नहीं जो खोने का डर है


जब से चली हूँ, पाबंद हूँ इसी में

ख़त्म होता नहीं, कैसा सफ़र है


दर्द बहल जाता है 'अहमक' दिल का

ख़ुदा की नैमत है लिखने का हुनर है


Rate this content
Log in