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Arunima Bahadur

Others Children

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Arunima Bahadur

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काश!बचपन न जाता

काश!बचपन न जाता

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काश! बचपन न जाता।

उम्र बढ़ती पर बचपन न जाता।

मन यू ही खिलखिलाता यू ही गाता।

बचपन जो कभी न जाता।

वह भोलापन सदा साथ रहता,

समझदारों सी समझदारी न लाता।

नासमझ ही बनाता

पर बचपन कभी न जाता


वही खिलौने वही क्रीड़ा

न होती कभी कोई पीड़ा

गीत सदा यह गुनगुनाता

जो बचपन कभी न जाता

बचपन मे जो सबको जीना आता

दुर्घटनाओं का दौर घट जाता

स्वार्थ लोलुपता से

न नाता होता

जो बचपन कभी न जाता

हँसता हँसाता और खिलखिलाता

झूठमूठ का भिड़ता भिड़ाता

पर बचपन कभी न जाता

न रोग न दोष लाता

जीवन सदा तब मुस्काता

जब बचपन कभी न जाता


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